Taxpayers not required to disclose high-value transactions in ITR | इनकम टैक्सपेयर्स को नहीं देनी होगी होटल बिल-बीमा प्रीमियम जैसे बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी, आईटीआर फॉर्म में भी कोई बदलाव नहीं होगा

नई दिल्ली20 मिनट पहले

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हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि आईटीआर दाखिल करते समय टैक्सपेयर को हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की जानकारी देनी होगी।

  • वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा-स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन में विस्तार का टैक्सपेयर्स पर असर नहीं
  • केवल थर्ड पार्टी से ली जाती है हाई वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन की जानकारी, फॉर्म-26 एएस में मिलती है पूरी सूचना

इनकम टैक्सपेयर्स के लिए सरकारी मोर्चे से एक राहत की खबर आई है। टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करते समय हाई वैल्यू वाले यानी बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी नहीं देनी होगी। इस मामले से वाकिफ एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

आईटीआर फॉर्म में बदलाव का भी कोई प्रस्ताव नहीं

अधिकारी का कहना है कि सरकार के पास आईटीआर फॉर्म में बदलाव को लेकर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। अधिकारी ने यह बात उन रिपोर्ट्स पर कही है जिनमें स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के विस्तार की बात कही गई थी। साथ ही आईटीआर में हाई वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन की जानकारी देने को कहा गया था। इसमें 1 साल में 20 हजार से ज्यादा के होटल बिल, 50 हजार से ज्यादा के बीमा प्रीमियम भुगतान, 20 हजार से ज्यादा के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भुगतान और स्कूल कॉलेज को डोनेशन या भुगतान में 1 लाख रुपए से ज्यादा देना शामिल है।

केवल वित्तीय संस्थान देंगे हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन की जानकारी

अधिकारी का कहना है कि एसएफटी में विस्तार का मतलब है कि ऐसे हाई वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन की जानकारी केवल वित्तीय संस्थान ही इनकम टैक्स विभाग को देंगे। अधिकारी के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट के तहत केवल थर्ड पार्टी ही हाई वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दे सकती हैं। इस जानकारी का इस्तेमाल ऐसे लोगों की पहचान के लिए किया जाता है जो टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं। ईमानदार करदाताओं से जुड़े मामलों के परीक्षण के लिए इस सूचना का इस्तेमाल नहीं होता है।

हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन से आय की जानकारी छिपाने वालों की होती है पहचान

अधिकारी का कहना है कि हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन संबंधी रिपोर्ट्स से आय की जानकारी छिपाने वालों की पहचान की जाती है। ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए यह एक प्रमुख टूल है। अधिकारी के मुताबिक, बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो बड़े ट्रांजेक्शन करने के बाद भी आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं। यह लोग दावा करते हैं कि उनकी सालाना आय ढाई लाख रुपए से कम है।

हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में आधार-पैन की जानकारी देना जरूरी

वित्त मंत्रालय से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट में यह व्यवस्था पहले से ही है कि हाई वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन में पैन या आधार की जानकारी देनी होगी। साथ ही थर्ड पार्टी को ऐसे ट्रांजेक्शन की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को देनी होगी। टैक्स बेस बढ़ाने के लिए यह पूरी प्रक्रिया तय की गई है। सूत्र का कहना है कि 138 करोड़ की आबादी वाले भारत में टैक्स भरने वालों की संख्या कुछ करोड़ में ही है। और जिन लोगों को टैक्स भरना चाहिए, वे ऐसा नहीं कर रहे हैं।

इनकम टैक्स विभाग को अभी यहां से मिलती है जानकारी

इनकम टैक्स विभाग को अभी सेविंग बैंक अकाउंट में कैश डिपॉजिट या निकासी, अचल संपत्ति की खरीदारी और बिक्री, क्रेडिट कार्ड भुगतान, शेयर, डिबेंचर, विदेशी मुद्रा और म्यूचुअल फंड खरीदारी की जानकारी मिलती है। यह जानकारी, बैंक, म्यूचुअल फंड्स, बॉन्ड जारी करने वाले संस्थान, रजिस्ट्रार-सबरजिस्ट्रार कार्यालय देते हैं। इनकम टैक्स विभाग को वित्त वर्ष 2016 से यह जानकारी मिल रही है।

2020-21 के बजट में फॉर्म-26 एएस में हुआ है बदलाव

वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में सरकार ने फॉर्म 26 एएस में बदलाव किया है। फॉर्म 26AS एनुअल टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है। टैक्सपेयर इसे इनकम टैक्स पोर्टल पर बने अपने अकाउंट से डाउनलोड कर सकता है। इसमें आपकी आय पर काटे गए टैक्स की जानकारी होती है। साथ ही आपसे टैक्स कलेक्टर की ओर से वसूला गया टैक्स, चुकाया गया एडवांस टैक्स, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पेमेंट, रेगुलर असेसमेंट टैक्स, वित्त वर्ष में आपको मिला हुआ रिफंड और शेयर, म्युचुअल फंड्स आदि के संबंध में हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की डिटेल होती है।

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