Persistent mask-wearing frontline workers are becoming victims of

Persistent mask-wearing frontline workers are becoming victims of “maskne”, according to experts – cases of pimples on the face increased during the epidemic | कोरोना-काल में चेहरे पर मुंहासों के मामले के बढ़े, फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स ‘मास्कने’ का शिकार हो रहे; पर 3 बातों का ध्यान रख आप बच सकते हैं

  • मास्क के नीचे आने वाले पसीने से हो सकते हैं मास्कने, एक्सपर्ट्स मास्क को बार-बार साफ करने की सलाह देते हैं
  • अगर आप मास्क लगातार पहन रहे हैं तो मेकअप को कम कर दें और चेहरा धोने के बाद मॉश्चेराइजर का उपयोग करें

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 02:05 PM IST

कर्टनी रूबिन. कोरोनावायरस महामारी के बीच कोरियन स्किन कंपनियों ने “मास्कने एजेंशियल्स” नाम से कलेक्शन रिलीज किए हैं। दरअसल, दुनिया में एक नया शब्द “मास्कने” सामने आया है। इसका मतलब होता है मास्क पहनने से होने वाले मुंहासे या चेहरे पर जलन। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन में डर्मेटोलॉजी की एसोसिएट क्लीनिकल प्रोफेसर डॉक्टर मोना गोहरा भी अपने तीन लेयर मास्क के कारण मास्कने से जूझ रही हैं। 

हेल्थ केयर वर्कर्स को ज्यादा खतरा
मास्कने का सबसे ज्यादा खतरा हेल्थकेयर वर्कर्स और दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स को है। क्योंकि ये सभी टाइट मास्क को काफी लंबे वक्त तक पहन रहे हैं। जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में छपे एक रिसर्च के मुताबिक, चीन के हुबेई में करीब 83 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी चेहरे पर स्किन प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों में भी मुंहासों की समस्या में इजाफा हुआ है। 

मैनहैटन में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर व्हिट्नी बोव ने बताया कि पूरी प्रैक्टिस के दौरान पहली बार मुंहासों को लेकर बातचीत में इजाफा हुआ है। उनके इंस्टाग्राम पर भी लोग डायरेक्टर मैसेज कर मास्कने के बारे में बात कर रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि मास्क स्किन की पुरानी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं या नई दिक्कतें भी खड़ी कर सकते हैं। साथ ही गर्मी और उमस में मामला और बिगड़ जाता है।

इन 3 बातों का ध्यान रख आप मास्कने से बच सकते हैं-

1. सही मास्क का सिलेक्शन करें

  • केवल आप ही यह तय कर सकते हैं कि आपको मास्क के मैटेरियल और प्रोटेक्शन में किस तरह से संतुलन बनाना है। डर्मेटोलॉजिस्ट 100% कॉटन मास्क को अच्छा मानते हैं, क्योंकि यह त्वचा को सांस लेने का मौका देता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा आपको पसीना ज्यादा आएगा। ऐसे में आपको मास्क को साफ रखना होगा।
  • टेंपल यूनिवर्सिटी के लुइस काट्ज स्कूल ऑफ मेडिसिन में डर्मेटोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर कैंड्रीस हीथ कहती हैं कि आपको इसे अंडरवियर की तरह ट्रीट करना होगा और लगातार धोते रहना होगा।

2. स्किन केयर प्रोडक्ट्स कम इस्तेमाल करें

  • कई लोग बहुत ज्यादा ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मास्क पहनना प्रोडक्ट्स को कम करने के लिए अच्छा बहाना हो सकता है। डेल मेडिकल स्कूल में डर्मेटोलॉजी सर्जरी की डायरेक्टर डॉक्टर एस टायलर हॉलमिग कहते हैं कि जितने कम सामान उतना ज्यादा अच्छा। यहां आपकी मदद मॉश्चेराइजर कर सकता है। यह आपको मास्क फ्रिक्शन (रगड़) से बचाते हैं।
  • कम प्रोडक्ट्स उपयोग करने का एक और कारण यह हो सकता है कि मास्क आपकी स्किन तक प्रोडक्ट को गहनता से पहुंचाते हैं। वहीं, एसिड या रेटिनॉल्स वाले कुछ प्रोडक्ट्स, जो जलन पैदा करते हैं। इनका असर आपकी स्किन के लिए ठीक नहीं है। 

3. मेकअप से ब्रेकअप

  • अगर आपने वीडियो कॉल के लिए मेकअप किया है तो बाहर जाने से पहले उसे हटा लें। डॉक्टर हीथ के मुताबिक, मेकअप को कम करने का यह अच्छा वक्त है। वो लोग जो आदत तोड़ नहीं सकते, उन्हें डॉक्टर हीथ सनस्क्रीन के साथ टिंटेड मॉश्चेराइजर के उपयोग की सलाह देती हैं।
  • डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर शारी मार्चबैन के मुताबिक, अगर आपको मास्क के अंदर पसीना आ रहा है तो आप उसे हटाने के बाद जेंटल क्लीन्जर से साफ कर लें। इसके अलावा आप मॉश्चेराइजर भी लगा सकते हैं।

मास्कने का इलाज कैसे करें?

  • अगर आपको मास्कने हो गया है तो एक बात याद रखें मुंहासों का इलाज परेशान करने वाला हो सकता है। आपको जलन होने पर भी मास्क पहनना पड़ेगा। डॉक्टर मोना के मुताबिक, आम मुंहासों की तुलना में मास्कने को लेकर आपको सावधानी रखनी होगी। 
  • स्किन कलर ट्रीटमेंट की विशेषज्ञ डॉक्टर मोना के मुताबिक हाइपरपिगमेंटेशन वाले मरीजों को घर के अंदर भी सनस्क्रीन का उपयोग करें। क्योंकि डिवाइस से निकली ब्लू लाइट परेशानी को और भी बढ़ा सकती है।
  • डॉक्टर मोना के अनुसार, अगर आपके चेहरे पर ये रेशे ज्यादा लगें और आपको इसे खरोंचने का मन करे, तो हो सकता है कि यह मुंहासा न हो। यह आपको मास्क के मेटल या रबर पार्ट और धोने के बाद फैब्रिक से हो सकते हैं। ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।  
  • डॉक्टर बोव कहते हैं कि मुंहासों के दो और कारण तनाव और भोजन हो सकते हैं। जामा डर्मेटोलॉजी में बीते हफ्ते प्रकाशित हुई एक बड़ी एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी बताती है कि चॉकलेट और दूसरे हाई ग्लाइसेमिक फूट और डेयरी प्रोडक्टर मुंहासों का कारण हो सकते हैं।

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