People may suffer from OCD due to epidemic; symptoms of older patients worsen; The condition of patients with washing compulsion is worst | कोरोना के कारण अब OCD का शिकार हो रहे लोग, यह एक मानसिक बीमारी है; जानिए इसके क्या हैं सिम्पटम्स

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  • People May Suffer From OCD Due To Epidemic; Symptoms Of Older Patients Worsen; The Condition Of Patients With Washing Compulsion Is Worst

30 मिनट पहले

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  • OCD से जूझ रहा व्यक्ति कभी-कभी एक दिन में 60 या इससे ज्यादा बार अपने हाथ धोता है
  • महामारी से पहले ऐसे व्यवहार को अजीब समझा जाता था, पर अब इसे नॉर्मल माना जाने लगा है

गुड्रुन हेज. ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD), यह एक ऐसी मानसिक परेशानी है जिसमें व्यक्ति डर या चिंता के कारण एक ही चीज को बार-बार दोहराता है। उदाहरण के लिए OCD से जूझ रहा व्यक्ति कभी-कभी एक दिन में 60 या इससे ज्यादा बार अपने हाथ धोता है। गंभीर मामलों में दिन में कई बार कपड़े भी बदलता है, हैंडल छूने से पहले बार-बार डिसइंफेक्ट करता है, लोगों से दूरी बनाए रखना जैसी आदतें शामिल हो सकती हैं।

OCD से जूझ रहे लोग खुद को बैक्टीरिया, वायरस या गंदगी से बचाने की कोशिश करते हैं। सफाई के ये उपाय घबराहट या चिंता को कुछ समय के लिए कम कर देते हैं, लेकिन जल्द ही डर फिर बढ़ता है और सबकुछ दोबारा शुरू हो जाता है। कोविड 19 से पहले ऐसे व्यवहार को अजीब और असामान्य समझा जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।

असामान्य से सामान्य का सफर
इन हालात में हमसे बार-बार हाथ धोने की अपील की जा रही है। महामारी से पहले हम जिसे असामान्य समझ रहे थे, वो अब लगभग सामान्य हो गया है। जर्मन सोसाइटी फॉर ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर की एंटोनिया पीटर्स के मुताबिक, इससे OCD से ग्रस्त लोगों में कन्फ्यूजन बढ़ा है।

पीटर्स कहती हैं ” OCD से परेशान लोगों के लिए यह समझ से बाहर है कि अचानक लोग मास्क और ग्लव्ज पहनकर घूमने लगे हैं। कुछ सोच रहे हैं कि यह पहले हमारा खास ट्रेडमार्क हुआ करता था। अब इसे सभी अपना रहे हैं।”

महामारी के दौरान बढ़ी सफाई की मजबूरी
पीटर्स के अनुसार, वॉशिंग कम्पल्शन (धुलाई की मजबूरी) से जूझ रहे लोगों ने पाया है कि महामारी के दौरान उनकी यह मजबूरी और बढ़ी है। ये लोग अब ज्यादा सफाई रख रहे हैं और मुश्किल से बाहर निकलने की हिम्मत कर पा रहे हैं।

ठीक हो रहे मरीज भी हो रहे प्रभावित
OCD का इलाज सामान्य हालात में भी एक लंबी प्रक्रिया है, जबकि अभी महामारी चल रही है। पीटर्स कहती हैं “जो मरीज थैरेपी के दौरान खुद पर काम कर रहे थे, उन्हें भी महसूस होने लगा है कि अब सब दोबारा शुरू करना होगा। साथ ही उन्होंने थैरेपी में जो भी कुछ सीखा वो बेकार हो गया।” व्यवहार करने के तरीकों को बनाए रखना मरीजों के लिए काफी मुश्किल है।

इसके अलावा मरीजों में विरोध भी नजर आने लगा है। जर्मन सोसाइटी ऑफ कंपल्सिव डिसीज के मेंबर्स न्यूजलैटर में एक युवा ने अपनी बात लिखी। उसने लिखा कि आखिरकार समाज उसके साथ चल रहा है और लोगों को यह एहसास होने लगा है कि जो वो कर रहा था, वो नॉर्मल था।

कोरोनावायरस महामारी में खराब हुए हालात
मेडिकल सेंटर हेमबर्ग-एपेनडोर्फ की लीना जेलिनेक ने OCD मरीजों पर पड़ रहे कोरोनावायरस और इससे जुड़े डर और पाबंदियों का असर जानने के लिए स्टडी की है। हालांकि यह स्टडी अभी पब्लिश नहीं हुई है। स्टडी में शामिल वैज्ञानिक इस बात में दिलचस्पी रखते थे कि धुलाई की मजबूरी वाले लोग और दूसरी तरह की OCD से जूझ रहे लोगों में फर्क था या नहीं।

लीना ने कहा कि इस सर्वे में करीब 400 लोग शामिल हुए थे। इस सर्वे में यह पता लगाया जाना था कि OCD से जूझ रहे लोग कोरोनावायरस महामारी में किस तरह डर रहे थे और इस दौरान उनकी हालत ठीक या खराब हुई थी। उन्होंने कहा “दो तिहाई से ज्यादा लोगों ने कहा कि इस दौरान उनके कंपल्सिव सिम्प्टम बदतर हुए हैं। धुलाई की मजबूरी वाले लोगों की हालत और भी ज्यादा गंभीर थी।”

हेमबर्ग स्टडी के पहले आकलन में वैज्ञानिकों ने पाया कि शामिल हुए 7 प्रतिशत से कम लोगों में कंपल्सिव लक्षण कम हुए थे। इसके अलावा एक चिंता का विषय यह भी है कि महामारी के कारण की लोगों में पहली बार OCD विकसित हो सकता है।

OCD से जूझ रहे लोग बीमारी के बारे में किसी से बात करने में बचते हैं।

बचपन में ही विकसित हो जाते हैं OCD के एक चौथाई मामले
OCD आज भी टैबू है। इससे प्रभावित लोग अपनी बीमारी को लेकर शर्म महसूस करते हैं और दूसरों से छुपाकर रखते हैं। फिर इससे फर्क नहीं पड़ता कि इनमें कौन सी कंपल्सिव हरकतें शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए अगर आप कम्पल्शन फॉर कंट्रोल से जूझ रहे हैं तो आप बार-बार बंद स्टोव और गेट की जांच करेंगे।

लीना समझाती हैं “इसमें कोई असल खतरा नहीं है। लोगों को यह पता होता है कि उन्होंने स्टोव को बंद कर दिया है, लेकिन कई बार वे अपनी समझ पर भी भरोसा नहीं करते हैं।” OCD के विकसित होने में कई चीजें जरूरी भूमिका निभाती हैं, जिसमें परिवार की प्रवृत्ति भी शामिल है। OCD के करीब एक चौथाई मामले बचपन में ही सामने आ जाते हैं। बुरे अनुभव, असामान्य हालात और जीवन का बुरा दौर भी OCD की शुरुआत करने का कारण बन सकता है।

अकेले होने का एहसास
स्टडी में शामिल होने वाले कुछ लोगों को यह महसूस हो रहा था कि उनकी हालत सुधर रही है, जबकि इनमें से ज्यादातर लोगों ने अपनी हालत को बिगड़ते देखा। लीना के अनुसार, स्टडी में शामिल कुछ लोगों को ऐसा लगा कि “मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि आखिरकार मुझे समझा गया। आखिरकार लोगों ने मुझे गंभीरता से लिया। मैं कई लोगों को जानता हूं जो अचानक डरे हुए हैं इसलिए मुझे अब अकेला महसूस नहीं होता।”

लीना ने बताया “वे इन हालात को इस तरह से बताते थे कि ‘मेरी दुनिया में तुम्हारा स्वागत है, जो तुम अब महसूस कर रहे हो, ऐसा मेरे जीवन में कई सालों से चला आ रहा है।’

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