Government to finalize regulation to limit trans fats during covid-19 pandemic  | अब आपके खाने पर होगी सरकार की नजर; केन्द्र सरकार फूड में ट्रांस वसा की सीमा तय करने पर लेगी फैसला

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नई दिल्लीएक मिनट पहले

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ज्यादातर मरीज जिनकी कोविड-19 से मौत हुई है, उनमें शुरुआती तौर पर कुछ और भी बीमारियां थीं

  • सरकार जल्द ही ट्रांस फैट एसिड जैसे तत्वों का खाने के उत्पादों में कम उपयोग करने के बारे में फैसला ले सकती है
  • खाने में ट्रांस फैट्स के ज्यादा होने से हार्ट अटैक की संभावना ज्यादा रहती है

केंद्र सरकार जल्द ही ट्रांस फैट एसिड जैसे तत्वों का खाने के उत्पादों में कम उपयोग करने के बारे में फैसला ले सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके ज्यादा उपयोग से लोगों में कोविड-19 के अलावा भी तमाम बीमारियां बढ़ रही हैं।

फूड रेगुलेटर ने खाद्य सुरक्षा और मानकों (निषेध और बिक्री पर प्रतिबंध) के नियमों में संशोधन के माध्यम से फूड प्रोडक्ट में ट्रांस वसा को लिमिट करने के लिए सितंबर 2019 में एक ड्राफ्ट का प्रस्ताव जारी किया था।

जल्द से जल्द अनिवार्य कर दिया जाएगा

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण सिंघल ने बताया कि हमने प्रस्तावित ट्रांस-फैट लिमिट रेग्युलेशन को तेज करने का फैसला किया है।

ट्रांस वसा के लेबलिंग पर होगा फोकस

कोरोना के चलते ज्यादातर होटल, रेस्तरां यहां तक कि साधारण भोजनालयों के कारोबार को नुकसान उठाना पड़ा है। इसलिए ट्रांस वसा के लेबलिंग पर थोड़ा ध्यान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले फूड कंपनी ने खुद ही माना था कि वे ट्रांस वसा को सीमित करेगी। लेकिन अब इसे जल्द से जल्द अनिवार्य करने की योजना बना रहे हैं।

करीबन 55 हजार लोगों की मौत हो चुकी

भारत में कोविड-19 के कारण करीबन 55 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से ज्यादातर लोग किसी और दूसरी बीमारी जैसे स्ट्रोक, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी की बीमारी आदि से पीड़ित थे। खाने में ट्रांस फैट्स के ज्यादा होने से हार्ट अटैक की संभावना ज्यादा रहती है। कोविड-19 में मरने वालों का ज्यादा कारण हार्ट अटैक रहा है। ज्यादातर मरीज जिनकी कोविड-19 से मौत हुई है, उनमें शुरुआती तौर पर कुछ और भी बीमारियां थीं।

ट्रांस फैट की सीमा को रेगुलेट किया जाएगा

एफएसएसएआई के सीईओ अरुण सिंघल ने कहा कि हमने फैसला किया है कि ट्रांस फैट की सीमा को रेगुलेट किया जाए क्योंकि यह इस महामारी में यह जरूरी है। इसके तहत सितंबर 2019 में एक रेगुलेशन का ड्राफ्ट तैयार किया गया था जिसमें खाने के पदार्थों में ट्रांस फैट की मात्रा 2 प्रतिशत से ज्यादा न हो।

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