after being in isolation for two weeks, the elderly can hold children too

after being in isolation for two weeks, the elderly can hold children too | नवजात से ज्यादा अस्पताल में रुके पैरेंट्स को संक्रमण का खतरा, एक्सपर्ट्स की सलाह- बच्चों से मिलने के लिए 5 बातों का जरूर ध्यान रखें

  • कोई भी पार्टी प्लान न करें, यदि करें भी तो सेलिब्रेशन में केवल दादा-दादी, बच्चा और पैरेंट्स शामिल हों
  • यह सुनिश्चित कर लें बच्चे से मिलने वाले शख्स को खांसी, सर्दी, फ्लू या कोई भी बीमारी के लक्षण तो नहीं हैं
  • दो हफ्ते तक आइसोलेशन में रहने के बाद बुजुर्ग भी बच्चों को गोद में ले सकते हैं, उससे पहले ज्यादा खतरा

दैनिक भास्कर

Jun 18, 2020, 01:02 PM IST

एरॉन ई कैरॉल. कोरोनावायरस फैलने के बाद लोग अपने जीवन के कई खूबसूरत लम्हें खो चुके हैं। फिर चाहे वो शादी, ग्रेजुएशन या जन्मदिन हो, लेकिन सबसे दुखी करने वाली बात है बुजुर्ग दादा-दादी का अपने हाल ही में जन्में पोता/पोती से न मिल पाना। मार्च और अप्रैल में जब महामारी बढ़ी तो इस बात का थोड़ा डाटा मौजूद था कि कहां और किन लोगों में कोरोना फैल रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज्यादा सावधानी बरतने की अपील की। कई लोग संक्रमित थे, लेकिन उन्हें इस बात की खबर भी नहीं थी। 

अब हालात बदल रहे हैं। एक महीने पहले बुजुर्गों के लिए मासूम बच्चों से मिलना असंभव था। अब परिवार यह जानना चाहते हैं कि क्या यह सेफ है और अगर है तो हम इसे कैसे कर सकते हैं। हालांकि हम कभी भी जोखिम को एकदम खत्म नहीं कर सकते, लेकिन इसे कम करने के लिए उपाय कर सकते हैं। अगर परिवार यह फॉलो करना चाहते हैं तो यह बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए सुरक्षित होगा।

बच्चों से ज्यादा मां-बाप को खतरा

  • हाल ही में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि नवजातों को कोरोनावायरस का जोखिम कम है। हालांकि बीच में आने वाली मामलों की रिपोर्ट चिंता बढ़ा सकती हैं, लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं लगता कि नवजात कोविड 19 से गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। नए पैरेंट्स को बच्चों की तुलना में कोरोनावायरस कॉम्प्लिकेशन्स का ज्यादा खतरा है, लेकिन जब तक उन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं होती कुछ लोग ही गंभीर रूप से बीमार होंगे।
  • बुजुर्गों में कोविड 19 ज्यादा परेशानी करने वाला है। क्योंकि संक्रमित होने पर बुजुर्गों के गंभीर रूप से बीमार होने और मौत की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग जो कोरोनवायरस के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, वे नर्सिंग होम में रहा करते थे। इस सेटिंग के बाहर भी ऐसा माना जाता है कि संक्रमण से मरने की दर व्यसकों में ज्यादा है। 

नवजात बच्चों के पैरेंट्स और उनसे मिलने वाले इन 5बातों का ध्यान रखें –

पैरेंट्स और बुजुर्ग सेल्फ आइसोलेशन में जाएं

  • नए पैरेंट्स को यह याद रखना चाहिए कि उनके संक्रमित होने का जोखिम ज्यादा होता है। क्योंकि पैरेंट्स अस्पताल में ज्यादा वक्त बिताकर आ रहे होते हैं। ऐसे में कई एक्स्पर्ट्स माता-पिता को दो हफ्ते के लिए बच्चे से सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह देते हैं। इस दौरान किसी भी बाहरी का आना सुरक्षित नहीं माना जाता है। ध्यान से किया गया आइसोलेशन जोखिम को कम कर सकता है। दो हफ्तों के बाद लोग कह सकते हैं कि वे संक्रमित नहीं हैं।
  • येल यूनिवर्सिटी में एपिडेमियोलॉजी और लॉ के प्रोफेसर ग्रैग गोन्जाल्वेज के अनुसार, नए पैरेंट्स को सेल्फ आइसोलेशन करना चाहिए। इसके साथ ही सुरक्षित रहने के लिए दादा-दादी को भी दो हफ्ते आइसोलेशन में रहना चाहिए। 

सफर के दौरान रखें ध्यान

  • हम नहीं चाहते कि मिलने के लिए आते वक्त कोई वायरस के संपर्क में आए, इसलिए हवाई यात्रा न करें। बुजुर्गों को बच्चों से मिलने के लिए अकेले ड्राइव कर आना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो आप बच्चे को लेकर उनके पास जाएं। अगर ड्राइव ज्यादा लंबी है तो खाना और पानी साथ रखें और कोशिश करें कि आपको रुकना न पड़े। इसके अलावा अगर रुकना पड़ता है तो पूरे रास्ते बेहतर साफ-सफाई रखें।

पार्टी प्लान न करें

  • जितना हो सके उतने कम लोग हों। आदर्श रूप से पैरेंट्स, बच्चा और दादा-दादी। अगर कोई रिश्तेदार इस परिवार के साथ ही आइसोलेट है तो वो भी शामिल हो सकता है। इसके अलावा अगर कोई इस सेलिब्रेशन में जुड़ना चाहता है तो जूम या फेस टाइम के जरिए जुड़ सकता है। 

कोई बीमार न हो

  • इस मीटिंग के दौरान सभी को स्वस्थ्य होना चाहिए। किसी को भी सर्दी, खांसी, फ्लू या कोई भी लक्षण नहीं होने चाहिए। सभी को अपने छूने को लेकर सतर्क रहना चाहिए, खासकर चेहरे को। 

वैक्सिनेशन अपडेट हो

  • सभी को अपनी वैक्सिनेशन को लेकर अप टू डेट होना चाहिए। एक बच्चों का डॉक्टर इस तरह की जानकारियों का अच्छा सोर्स होता है। क्योंकि वे महामारी से पहले भी यह काम कर रहे थे। अच्छी खबर यह है कि अगर सभी ध्यान दे रहे हैं तो बुजुर्गों का बच्चों को गोद में लेना सुरक्षित है। कॉन्टेक्ट को जितना हो सके कम से कम रखें। 
  • कुछ लोगों को लगता है कि सभी सावधानियों के बाद भी यह सुरक्षित नहीं है। अगर वे सावधानी को पूर्ण सुरक्षित और बिना जोखिम की तरह डिफाइन करते हैं तो उनके पास एक पॉइंट हो सकता है। कोरोनावायरस जादुई नहीं है। यह बचने के लिए किए गए उपायों के पास नहीं आ सकता है। 

एक्सपर्ट ने कहा- हमें मुश्किल फैसले लेने होंगे 
जॉन्स हॉप्किन्स सेंटर फॉर हेल्थ सिक्युरिटी में एपिडेमियोलॉजिस्ट कैटलिन रिवर्स बताती हैं कि यह जोखिम हैं, लेकिन हमें हमारी जोखिम सहन करने की ताकत, हालात और प्राथमिकताओं को आधार बनाकर मुश्किल फैसले लेने होंगे। इसमें पब्लिक हेल्थ का काम लोगों को जानकारी देना होता है, ताकि वे इस तरह के फैसलों को लेकर विचार कर सकें। अगर हर कोई आइसोलेटिंग, डिस्टेंसिंग और सावधान रहेगा तो जोखिम कम से कम होगा।  

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में बायोस्टेटिस्टिक्स की असिस्टेंस प्रोफेसर नताली डीन कहती हैं कि मुझे लगता है कि अगर लोग दो हफ्तों तक सावधान हैं, कोई लक्षण नहीं है और संपर्क में नहीं आए हैं तो करीबी रिश्तेदार आ सकते हैं और बच्चे को गोद में ले सकते हैं। तेज और भरोसेमंद टेस्टिंग काफी कुछ आसाना कर देगी, लेकिन आंतरिक, सावधान और विचार के साथ की गई प्लानिंग बुजुर्गों और बच्चों को करीब ला सकती हैं।

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