सप्ताह भर में दोगुना हुआ आलू-प्याज का भाव; 60 तक प्याज तो टमाटर 100 रुपए के पार; हरी सब्जियों के भाव पहले से ही आसमान पर, अभी और बढ़ेंगे दाम

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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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दिल्ली समेत आसपास के कई इलाकों में रिटेल में इस समय प्याज 60 से 80 रुपए किलो के भाव पर बिक रहा है। 

  • पहले लॉकडाउन और अब बारिश के चलते देशभर में आलू-प्याज समेत हरी सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं
  • एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर में आज प्याज की कीमत थोक भाव में 40-45 रुपए पहुंच गई है

सब्जियों की कीमतों में इस वक्त आग लगी हुई है। लोगों की थाली से टमाटर, प्याज आलू समेत अन्य हरी सब्जियां गायब हो रही हैं। यूं तो हर साल बरसात में हरी सब्जी महंगी होती है। लेकिन आलू, टमाटर और प्याज की कीमत अगर काबू में रहे तब भी गुजारा चल जाता है।

एक ओर तो कोरोना काल में वैसे ही लोगों की आमदनी घटी है, रोजगार कम हुए हैं ऊपर से सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत ने आमजन को और परेशान करके रख दिया है। लॉकडाउन और बारिश के चलते देशभर में सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता समेत देशभर के सब्जी मंडियों में इस समय सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

प्याज की कीमत हुई दोगुनी

देश की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी आजादपुर मंडी, दिल्ली में आज यानी मंगलवार को प्याज की कीमत थोक भाव में 40-45 रुपए पहुंच गई है। यही सप्ताह भर पहले 15-20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिल रही थी। आजादपुर मंडी के चेयरमैन आदिल अहमद खान ने बताया कि दो सप्ताह तक सिर्फ टमाटर और बाकी हरी सब्जियों के रेट में बढ़ोतरी देखी जा रही थी लेकिन इस समय प्याज के भाव बढ गए हैं। दिल्ली समेत आसपास कई शहरों में रिटेल में इस समय प्याज 60 से 80 रुपए किलो के भाव पर बिक रहा है।

प्याज के दाम बढ़ने की वजह

आजादपुर मंडी के एक कारोबारी राजीव कुमार ने बताया कि प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे फसल का खराब होना है। दरअसल कर्नाटक, आंध्र, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से इस समय खरीफ के प्याज की उपज बाजार में आती है। लेकिन इन सभी राज्यों में भारी बारिश के चलते 50 फीसदी फसल खराब हो गई। साथ ही भारी बारिश ने महाराष्ट्र में प्याज के पुराने स्टाक की क्वालिटी पर भी असर डाला है। इसके इनकी कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है।

हर साल रुलाती है प्याज की कीमत

बता दें कि रबी और खरीफ दोनों में प्याज को बोया जाता है। महाराष्ट्र, गुजराज, कर्नाटक में ये फसल मई और नवंबर तक तैयार हो जाती है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, आंध्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बंगाल में ये फसल इसके आगे-पीछे तैयार होती है। हर साल प्याज की कीमतें बढ़ने से रोकने के उपाय किए जाते हैं। प्याज के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया जाता है, प्याज के स्टॉक पर रोक लग जाती है। सरकारी एजेंसियां सस्ते दामों पर प्याज की बिक्री शुरू कर देती है। बावजूद प्याज आम जनता का रुलाते रहता है। हालांकि, बढते दाम को देखते हुए सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी है। अब कीमतों में नरमी की उम्मीद है।

टमाटर भी तीन गुनी महंगी

टमाटर की रेट की बात की जाय तो दिल्ली के आजादपुर मंडी से लेकर गाजीपुर मंडी में इस समय टमाटर 80 रुपए के पार पहुंच गया है। मुंबई की सब्जी मंडियों में टमाटर 80 से 100 रुपए प्रति किलो के भाव पर पहुंच गई है। वहीं कोलकाता में टमाटर का भाव 100 रुपए के पार हो गया है। इतना ही इन शहरों में सभी हरी सब्जियों के भाव बढ़ गए हैं। इसी तरह इस समय आलू थोक में 26 रुपए किलो तो रिटेल में 35-40 रुपए किलो मिल रहा है। पिछले सप्ताह आलू का थोक भाव 15 रुपए प्रति किलो था।

कुछ दिन पहले तक टमाटर 50 रुपए में मिल रही थी

गाजीपुर मंडी के सब्जी विक्रेता राजीव साव ने बताया कि इस समय सब्जी सोने के भाव मिल रही है, 10 दिन पहले टमाटर 50-60 रुपए किलो था लेकिन आज यह 80 रुपए हो गया है। अगर 10 दिनों में इतने रेट बढ़ेंगे तो आम आदमी सब्जी कैसे खाएगा ? उन्होंने बताया कि सब्जियों के दाम बेतहाशा तरीके से बढ़ रहे हैं। इसलिए लोग सब्जी कम खरीद रहे हैं। बता दें कि गाजीपुर मंडी में सब्जियों के डिमांड में भारी कमी देखी गई है।

एक माह में डबल हुआ हरी सब्जी का रेट

कोलकाता, दिल्ली और मुंबई की मंडियों की बात की जाय तो यहां पिछले एक माह में हरी सब्जियों के दाम डबल हो गए हैं। पिछले माह बीन्स 27 रुपए के भाव पर मिल खरीदा गया, लेकिन इस माह बीन्स की कीमत 40 के आसपास पहुंच गई है। वहीं, मंडी में बैंगन इस समय 16 रुपए तो पिछले माह 8 रुपए किलो के भाव से बिकी थी। हालांकि, रिटेल में बैंगन की कीमत 25-30 रुपए के आसपास है। आज मंडी में शिमला मिर्च 36 रुपए किलो के दाम पर बेची गई है। लौकी थोक में 10 रुपए किलो तो रिटेल में 20 से 25 रुपए किलो मिल रही है। पिछले माह लौकी 5-7 रुपए किलो बिकी थी।

मंडी और मार्केट में सब्जी के दाम में अंतर क्यों?

आदिल अहमद बताते हैं कि मंडी में सब्जी सस्ती होने के बावजूद खुदरा व्यापारियों को महंगी रेट पर बेचनी पड़ती है। इसके पीछे कई वजह है। पहला तो इस समय उन्हें मंडी तक आने-जाने में कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। उसके बाद सफाई का खास ख्याल रखा जाता है। साथ ही एरिया के आधार पर सब्जियों की डिमांड को देखते हुए मनमुताबिक रेट पर बिक्री करते हैं। बता दें कि दिल्ली में क्वालिटी और इलाकों के हिसाब से टमाटर 60 से 80 रुपए किलो बिक रहा है।

अभी और बढ़ेंगे दाम ?

कृष्णा नगर मंडी में एक सब्जी कारोबारी ने बताया कि अगर एक बारिश और हो गई तो सब्जी और महंगी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि टमाटर के साथ आलू और प्याज के दाम भी अभी और ऊपर जाएंगे। आजादपुर मंडी के कारोबारी आदिल ने बताया कि अक्टूबर तक सब्जियों के रेट बढ़ने की संभावना है। हालांकि नवंबर से रेट में कमी आएगी। आदिल ने कहा कि बारिश के कारण ज्यादातर हरी सब्जियां खराब हो गई हैं लेकिन मार्केट में डिमांड अधिक होने के कारण हरी सब्जियों के भाव बढ़े हैं।

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