बच्चों के बैग में टिफिन के साथ मास्क और सैनिटाइजर भी रखें, बॉटल में गर्म पानी दें; जानिए और किन जरूरी बातों का रखें ध्यान

16 मिनट पहले

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  • बच्चों को बार-बार न बताएं कि उन्हें स्कूल में सुरक्षित कैसे रहना है, बल्कि उनसे जानें कि वे क्या करेंगे
  • पैरेंट्स स्कूल की पॉलिसी को लेकर जानकारी जुटाएं, बच्चों में उत्साह बढ़ाने के लिए करें पहले जैसी तैयारी

कैथरीन कुसुमानो. महीनों से बंद पड़े स्कूलों में बच्चों की दोबारा वापसी होने जा रही है। अनलॉक 4 की गाइडलाइंस में सरकार ने 9 से 12 क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खोलने का ऐलान किया है। इतने लंबे वक्त के बाद स्कूल लौटने पर बच्चों को काफी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं, अमेरिका के वरमॉन्ट में बच्चों की क्लासेज खुली हवा में टेंट के नीचे लग सकती हैं, जबकि कैरोलीना में बच्चों की डेस्क को दूरी पर रखा गया और इनके बीच प्लैसीग्लास लगाया है।

बच्चों के दोबारा स्कूल जाने को लेकर कई पैरेंट्स चिंतित हैं, जबकि लंबे समय बाद स्कूल लौटने पर कई बच्चे उत्साहित हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि बच्चों की स्कूल वापसी को लेकर क्या तैयारियां करनी चाहिए।

घर में सीखी अच्छी आदतों को दोहराएं
बीते महीनों से पैरेंट्स ने बच्चों को कई अच्छी आदतें सिखाई हैं। जैसे- ठीक से मास्क पहनना, हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना। सेंटर फॉर चाइल्ड हेल्थ, बिहेवियर एंड डेवलपमेंट के डायरेक्टर दिमित्री ए क्रिसटाकिस के अनुसार, पैरेंट्स इन आदतों को स्कूल के पहले ही दिन से लागू कर दें और सही तरह से इन्हें पूरा करने पर बच्चों को प्रोत्साहित करें।

पहले की तरह स्कूल की तैयारियां करें

  • येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के चाइल्ड स्टडी सेंटर के ट्रॉमा सेक्शन में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मीगन गोस्लिन कहती हैं कि “महामारी ने हमसे हमारे रुटीन समेत काफी कुछ छीना है।” ऐसे में जैसे आप पहले स्कूल की तैयारियां करते थे। उन्हीं तरीकों को फिर दोहराएं।
  • शॉपिंग के दौरान बच्चों को नया मास्क दिलाने पर विचार करें, ताकि वे स्कूल में इसे पहनने को लेकर उत्साहित रहें। एक पैकिंग लिस्ट जरूर बनाएं, क्योंकि आप हैंड सैनिटाइजर, मास्क और एक पानी की बोतल भूलना नहीं चाहेंगे।बोतल में हो सके तो गर्म पानी ही दें।

बच्चों को अगुवाई करने दें

  • हाथों की सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बातों को बच्चे पहले से ही जानते हैं। ऐसे में उन्हें एक ही चीज को बार-बार बताना परेशान कर सकता है। उन्हें याद दिलाने के बजाए सवाल करेंगे कि उन्हें क्या करना चाहिए और बच्चों को ही बात को आगे बढ़ाने दें। इससे वे ज्यादा बेहतर ढंग से काम को कर पाएंगे।
  • एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर में पीडियाट्रिक एपेडेमियोलॉजिस्ट जैनिफर लाइटर कहती हैं “बच्चे इन्हें अपने हिसाब से तय किए हुए लक्ष्य समझना शुरू कर देंगे।” अगर बच्चों के मन में कोई डर है तो उन्हें समझें। इतने अजीब हालातों में महीनों तक स्कूल से दूर रहने के बाद वे कुछ चीजों को लेकर चिंतित हो सकते हैं।

अपने साथ बच्चों को भी जानकार बनाएं
पैरेंट्स अपने बच्चों के टीचर्स या स्कूल की वेबसाइट की मदद से स्कूल की पॉलिसी को पूरी तरह समझ लें। इसके बारे में बच्चों को भी जागरूक करें। उदाहरण के लिए, उन्हें बताएं कि हो सकता है कि स्कूल पहुंचने पर उनका तापमान जांचा जाए। अगर बच्चा इन बदलावों से डर रहा है तो उन्हें बताएं कि इन बातों को मानकर वह अपने परिवार और दोस्तों को सुरक्षित रख सकते हैं। इसके अलावा उनपर जानकारियों का बोझ भी बढ़ाने से बचें।

बच्चों से खुलकर बात करें
डॉक्टर गोस्लिन बच्चों से रोज खाने के वक्त यह पूछती हैं कि वे स्कूल के बारे में दो बातें बताएं। पहला कि वे किस चीज को लेकर उत्साहित हैं और दूसरा किस चीज के बारे में सोच रहे हैं। यह एक तरह से रोज हाल जानने का तरीका है। इसमें टीचर की मदद को शामिल कर आप बच्चे की स्थिति का आसानी से पता कर सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं।

सेलिब्रेट करें
डॉक्टर गोस्लिन ने पाया कि बच्चे को स्कूल में घुलने-मिलने में एक हफ्ते या एक महीने का वक्त लग सकता है। यह वक्त पूरा होने के बाद बच्चों के सामने इसे उपलब्धि की तरह मानें। इस बात की खुशी मनाने के लिए बच्चों को बाहर ट्रीट पर ले जा सकते हैं।

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